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ज्वालामुखी में मजबूत गेंद फेंकेंगे, तो क्या होगा? क्या वह पहुंचेगी पृथ्वी के बीचोंबीच, या होगा कुछ और!

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  • February 9, 2024

पृथ्वी के केंद्र में जाना हो तो उसका सबसे आसान रास्ता सक्रिय ज्वालामुखी का मुंह होता है.  लेकिन यहां समस्या यह है कि इसमें बहुत ही ज्यादा गर्म लावा होता है जो सीधे पृथ्वी के मेंटल से आ रहा होता है. इसे छूते ही इंसान जल कर राख हो जाएगा. ऐसे में एक रोचक सवाल सामने आता है. क्या हो अगर पृथ्वी की सबसे मजबूत धातु की गेंद को ज्वालामुखी के अंदर डाल दी जाए? क्या वह पृथ्वी के अंदर क्रोड़ तक पहुंच कर उसे छू पाएगी या फिर वह भी उससे पहले ही पिघल कर पृथ्वी के अंदर के अन्य पदार्थों में मिल जाएगी?

यहां हम पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में बात कर रहे हैं. तो पहले यह समझते हैं कि पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत 40 किलोमीटर की गहराई की है. यह कम से कम 5 किलोमीटर और अधिक से अधिक 70 किलोमीटर मोटी है. अगर हम किसी 10 किलोमीटर गड्ढे में भी टंग्स्टन की गेंद डालें तो भी वह शायद ही पिघल सकेगी.

पर्पटी के नीचे मेंटल नाम की परत आती है. यह 2890 किलोमीटर गहरी होती है. इसी परत में मैग्मा होता है जो ज्वालामुखियों के जरिए पृथ्वी की सतह पर लावा के रूप में आता है. यानी पृथ्वी की गहराइयों में जाने का रास्ता ज्वालामुखियों से जाता है जिनके ट्यूब के जरिए ही कोई वस्तु पृथ्वी में बहुत नीचे जा सकती है. पर वह कौन सी ऐसी चीज है?

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पृथ्वी के अंदर ज्वालामुखी के जरिए भी मजबूद गेंद का सफर मुश्किल होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

पृथ्वी पर सबसे मजबूत धातु टंग्स्टन को माना जाता है. इसका गलांक यानी मेल्टिंग प्वाइंट 3422 डिग्री सेल्सियस होता है. मेंटल में तापमान सबसे कम 1000 डिग्री सेल्सियस  और क्रोड़ के पास आते आते यह तापमान 3700 डिग्री सेल्सियस हो जाता है. इस लिहाज से टंग्सटन की गेंद क्रोड़ पर पहुंचने सेही पिघल जाएगी.

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दरअसल ज्वालामुखी के अंदर केंद्र तक कोई सीधी ट्यूब नहीं हो जिसमें मैग्मा तरल रूप में भरा होता मैग्मा खुद भारी दबाव के कारण तरल पदार्थ रहता है. लेकिन इसमें टंग्सटन की बड़ी गेंद भी कम तापमान में अधिक दबाव के कारण पिघल सकती है. वहीं नीचे भी काफी दबाव होने पर किसी भी तरह के पदार्थ का नीचे जाना बहुत ही मुश्किल है. ऐसे में किसी टंगस्टन का पृथ्वी के क्रोड़ तक पहुंचना लगभग नामुमिकन है.

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